ट्रेन में जाते समय
मैंने एक भाई साहेब से अचानक ही
समय पूछ लिया ...
क्या आप समय बताएँगे
उन्होंने कहा नही॥!
हमने कहा क्यों
उन्होंने कहा की अगर हमने आपका समय बताएँगे
तो आप बातों का सिलसिला आगे बढायेंगे
फ़िर आप पूछेंगे आप कहा रहते हैं
हम कहेंगे स्टेशन के पास
अरे! स्टेशन के पास तो हम भी रहते हैं।
इसी तरह आप एक दिन मेरे घर आयेंगे
हम शरमाते हुए आपको सोफे पर बैठाएंगे
और अपनी बेटी से चाय मंगवाएंगे
फ़िर आप मेरी बेटी को देखते ही fida हो जायेंगे
और एक दिन मेरे नही रहने पर मेरे घर आयेंगे
और मेरी बेटी को पटाकर भाग जायेंगे
समय बहुत ख़राब चल रहा है
इसलिए, आपको समय नही बताएँगे
हास्य कविता
सोमवार, 5 अक्टूबर 2009
शुक्रवार, 20 फ़रवरी 2009
पत्नी की आरती
गुरुवार, 20 नवंबर 2008
किसको दिखाऊ हाल-ऐ-दिल
बड़ी जल्दी बदल जाता है उनका नजरिया।
बिना घुमे ही शहर और बाजारिया
प्रभु तुम मेरी रक्षा करना
बिना पानी के हो गया है आटा गिल
किसको सुनाऊं हाल-ऐ-दिल ।
बिना घुमे ही शहर और बाजारिया
प्रभु तुम मेरी रक्षा करना
बिना पानी के हो गया है आटा गिल
किसको सुनाऊं हाल-ऐ-दिल ।
सोमवार, 20 अक्टूबर 2008
नालायक की नसीहत और दर्द
गुरुवार, 16 अक्टूबर 2008
एक प्रयास, बच्चों द्वारा, सबके लिए..........
सभी ब्लॉगर भाइयों को बंडमरु का नमस्कार । पढने और पढाने वालो के लिए एक विशेष सूचना
आरा, भोजपुर , बिहार की एक अग्रणी संस्था यवनिका एक अनोखी बाल पत्रिका का प्रकाशन करने जा रही है। ये बाल पत्रिका इस मायने में अनोखी होगी की इसमे संपादन से लेकर रिपोर्टिंग तक का कार्य बच्चें ही करेंगे । सामान्य तौर पर हम बड़े आपने विचारों को बच्चों पर थोप देते हैं। वर्तमान की सारी बाल पत्रिकाएं इसी लिक पर चलती हैं, पर ये बाल पत्रिका बच्चों की नज़र से इस दुनिया को देखने की एक कोशिश हैं। ये पत्रिका बच्चों में पारम्परिक अध्ययन के अलावा लिखने, पढने, और सोचने की महत्वाकांक्षा को विकसित करने का एक प्रयास है। जैसा की नाम से ही प्रतीत होगा। इस पत्रिका का नाम है- '' आईना ''साक्षात्कार समाज का।
इतना ही नही यवनिका संस्था बच्चों को लेकर एक प्रोग्राम कराती है '' भोजपुर बाल महोत्सव '' जो इसी माह से शुरू होगा ।
इस कार्यक्रम में जिले से लगभग ७०००-८००० बच्चें भाग लेते हैं । पिछले ५ वर्षो में ये कार्यक्रम भोजपुर जिले में अपनी अलग पहचान बच्चों के बीच बना चुकी है। बच्चों को आपके आशीर्वाद aur hamko आपके सहयोग की आवश्य्कता है।
आरा, भोजपुर , बिहार की एक अग्रणी संस्था यवनिका एक अनोखी बाल पत्रिका का प्रकाशन करने जा रही है। ये बाल पत्रिका इस मायने में अनोखी होगी की इसमे संपादन से लेकर रिपोर्टिंग तक का कार्य बच्चें ही करेंगे । सामान्य तौर पर हम बड़े आपने विचारों को बच्चों पर थोप देते हैं। वर्तमान की सारी बाल पत्रिकाएं इसी लिक पर चलती हैं, पर ये बाल पत्रिका बच्चों की नज़र से इस दुनिया को देखने की एक कोशिश हैं। ये पत्रिका बच्चों में पारम्परिक अध्ययन के अलावा लिखने, पढने, और सोचने की महत्वाकांक्षा को विकसित करने का एक प्रयास है। जैसा की नाम से ही प्रतीत होगा। इस पत्रिका का नाम है- '' आईना ''साक्षात्कार समाज का।
इतना ही नही यवनिका संस्था बच्चों को लेकर एक प्रोग्राम कराती है '' भोजपुर बाल महोत्सव '' जो इसी माह से शुरू होगा ।
इस कार्यक्रम में जिले से लगभग ७०००-८००० बच्चें भाग लेते हैं । पिछले ५ वर्षो में ये कार्यक्रम भोजपुर जिले में अपनी अलग पहचान बच्चों के बीच बना चुकी है। बच्चों को आपके आशीर्वाद aur hamko आपके सहयोग की आवश्य्कता है।
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